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झारखंड के छात्रों और सरकार के बीच स्थानीय नियोजन नीति पर दूसरे दौर की वार्ता भी किसी समाधान पर नहीं पहुँच पाई, जिससे गतिरोध बरकरार है।
छात्र 1932 के खतियान-आधारित स्थानीय नीति को लागू करने और नियोजन नीति से हिंदी व अंग्रेजी को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
वार्ता विफल होने के बाद, छात्रों ने अपने आंदोलन को तेज करने और अपनी मांगों के पूरी होने तक विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है।