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प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता को सार्वजनिक करने में 'सार्वजनिक हित' का अभाव बताया गया है।
Live Law की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री की डिग्री को व्यक्तिगत जानकारी माना गया है।
यह तर्क सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के संदर्भ में सामने आया है।