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न्यायालय ने लाखों नागरिकों के मताधिकार छीनने वाली किसी भी प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण बताया है।
स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अदालत ऐसी प्रक्रियाओं को स्वीकार या अनुमोदित नहीं कर सकती।
यह टिप्पणी लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के महत्व पर जोर देती है।